तुम्हारी बातों में भी बहुत कशिश थी,
अब ख़ामोशी में भी दिलकशी कम नहीं।
बढ़ रही हैं आपकी भी बेताबियाँ बहुत,
इन दूरियों से आज़िज़ सिर्फ़ हम नहीं।
अब ख़ामोशी में भी दिलकशी कम नहीं।
बढ़ रही हैं आपकी भी बेताबियाँ बहुत,
इन दूरियों से आज़िज़ सिर्फ़ हम नहीं।
- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-088
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