4.1.23

P-185 हर बार,

हर बार, बार-बार करेंगे हम इंतज़ार तेरा,
अभी तो सिर्फ़ एक ही ज़िन्दगी गुज़री है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-185

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...