26.1.23

Q-089 फूल खिला भी

फूल खिला भी, और जल्द ज़र्द हो गया।
धूप निकली भी पर मौसम सर्द हो गया।
जब-जब आये राहतों के हल्के से झोंके,
हर बार टीस उठी, नया एक दर्द हो गया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-089

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...