2.1.23

S-218 आंधी तूफाँ भी

आंधी तूफाँ भी सर झुकाए निकल जाते हैं,
बुझा सका है कौन चिरागे-मुहब्बत को।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-218

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