उड़ लो आसमाँ में मगर आना तो
होगा ज़मीं पर ही,
हमने देखा नहीं है कब्रों को
आसमाँ में खुदते हुए ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-221
होगा ज़मीं पर ही,
हमने देखा नहीं है कब्रों को
आसमाँ में खुदते हुए ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-221
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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