11.1.23

Q-087 कभी तरसते थे

कभी तरसते थे धूप को, अब धूप अच्छी नहीं लगती,
कभी ढूंढते थे ज़रासी छांव,अब छांव अच्छी नहीं लगती,
कभी मांगते थे उम्र लंबी, ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती। Q-087

- वीरेंद्र सिन्हा अजनबी" Q-087

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