कभी तरसते थे धूप को, अब धूप अच्छी नहीं लगती,
कभी ढूंढते थे ज़रासी छांव,अब छांव अच्छी नहीं लगती,
कभी मांगते थे उम्र लंबी, ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती। Q-087
कभी ढूंढते थे ज़रासी छांव,अब छांव अच्छी नहीं लगती,
कभी मांगते थे उम्र लंबी, ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती। Q-087
- वीरेंद्र सिन्हा अजनबी" Q-087
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