ज़रूरी नहीं खिलौने में ही कोई नुक्स हो "अजनबी",
अक्सर खेलने वाला ही ऊब जाता है खिलौने से।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-223
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-223
ये दुनियां बहुत बदल चुकी है अब,
मेरे दिल तू भी वक्त रहते बदल जा।
बदलना तो पड़ेगा तुझे भी एक दिन,
आज बदल, या फिर कल बदल जा। Q-134
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...