13.9.23

Q-133 तुम न अब समेट

तुम न अब समेट पाओगे मुझे,
कुछ इस तराह टूटके बिखर गया हूँ।
तुम न बदल पाओगे वो हालात,
अब तलक जिनसे मैं गुज़र गया हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-133


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