12.9.23

P-220 कितनी खुशफहमियाँ

कितनी ख़ुशफ़हमियाँ हर रोज़ पाल लेते हैं हम,
अपने हिसाब से बातों का अर्थ निकाल लेते हैं हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-220

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