15.9.23

S-283 जाने कितने ख्याल

जाने कितने ख्याल दिल मे आए, और आते चले गए,
पर हम हैं कि हक़ीक़तों से ही रिश्ता निभाते चले गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-283

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...