ये दुनियां बहुत बदल चुकी है अब,
मेरे दिल तू भी वक्त रहते बदल जा।
बदलना तो पड़ेगा तुझे भी एक दिन,
आज बदल, या फिर कल बदल जा। Q-134
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment