28.9.23

M-074 चलो तुम्हे हम एक

चलो तुम्हे हम एक ख़ुश खबर सुनाएं,
सुनके जिसे आप भी फूले न समाएं,
हम बर्बाद हो गए, आपकी बद्दुआ से,
अब आप रकीबों के संग जश्न मनाएं।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" M-074

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...