27.8.22

P-135 उसने जो चाहा,

उसने जो चाहा, वो इल्ज़ाम दे दिया,
हम हैं कि बस तहज़ीब में बंधे रह गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-135 

25.8.22

P-134 ये भी एक बड़ा

ये भी एक बड़ा अजूबा नज़र मे आया,
इलाज हुआ उनका, आराम हमे आया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-134

S-166 हमारा चेहरा तो

हमारा चेहरा तो दुख जाता है ज़रा सी मुस्कान से,
जाने कैसे इतनी ज़ोर से खिलखिला लेते हैं लोग।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-166

Q-074 बामुश्किल चली थी

बामुश्किल चली थी एक बादे-सबा,
मुकद्दर ने उसका रुख भी मोड़ दिया।
संभाले बैठे थे टूटेफूटे दिल को भी हम,
आज बेवफ़ा ने रहे-सहे को भी तोड़ दिया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-074

24.8.22

S-165 बुलंदियों पर

बुलंदियों पर चढ़ कर लोग अक्सर उतर भी जाते हैं, 
दिल में चढ़े लोग मगर दिल से कभी उतर नहीं पाते हैं।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-165

20.8.22

P-133 दोस्त और दुश्मन

दोस्त या दुश्मन सदा नहीं होते,
आज हैं, तो कल नहीं भी होते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-133

P-132 तन्हाई की कोई

तनहाई की कोई तय मियाद नही  होती।
कब आ जाए कब चली जाए ख़बर नहीं होती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-132

10.8.22

P-131 ज़िन्दगी में गर

ज़िन्दगी में गर सबकुछ खोना नहीं चाहते,
तो किसी को "सबकुछ" मान भी मत लो। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-131

9.8.22

S-164 मुहब्बत ना भी

मुहब्बत ना भी रह जाए गर किसी बेवफ़ा से, 
तो भी उसे याद करना तहज़ीबे- इश्क होती है।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-164

8.8.22

P-130 लिपटे रहे,

लिपटे रहे, तो रिश्ते रह गए,
ज़रा चूके, तो रिश्ते बह गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-130

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...