24.8.22

S-165 बुलंदियों पर

बुलंदियों पर चढ़ कर लोग अक्सर उतर भी जाते हैं, 
दिल में चढ़े लोग मगर दिल से कभी उतर नहीं पाते हैं।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-165

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...