9.8.22

S-164 मुहब्बत ना भी

मुहब्बत ना भी रह जाए गर किसी बेवफ़ा से, 
तो भी उसे याद करना तहज़ीबे- इश्क होती है।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-164

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