27.8.22

P-135 उसने जो चाहा,

उसने जो चाहा, वो इल्ज़ाम दे दिया,
हम हैं कि बस तहज़ीब में बंधे रह गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-135 

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...