7.4.24

P-244 वक़्त ख़राब में

वक़्त खराब में क्या क्या नहीं होता,
कुछ बयां होता है कुछ बयां नहीं होता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-244

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...