29.3.24

S-315 उन रिश्तों के

उन रिश्तों के टूटने का क्या ग़म, जो कभी ख़ास नहीं थे।
उनसे दूर होना भी क्या दूर होना, जो कभी पास नहीं थे। 
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-315

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