6.4.24

S-316 आखिर में बस

आख़िर में बस मेरे ज़ख्मों को गिन लेना,
मैने हर ज़ख़्म पर एक ग़ज़ल लिक्खी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-316

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