28.3.24

P-242 दुआ करता हूँ

दुआ करता हूँ  अल्लाह तुझे तौफ़ीक़ दे, 
मैं न करूंगा गाली गुफ़्तार, मैं रोज़े से हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-242

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...