5.3.24

S-313 मैं भी 'अपनों' को

मैं भी 'अपनों' को जलाने लगा हूँ,
यूंही झूंठमूठ को मुस्कुराने लगा हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-313

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K-007 सूरज को मैं

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