3.3.24

S-312 तमाम गुनहगारों ने

तमाम गुनहगारों ने हमें सुना  दी है सज़ा, 
"हमारा जुर्म शराफ़त है, क्या किया जाये,"
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-312

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...