13.2.24

S-306 मैंने बचाकर रक्खी है

मैंने बचा कर रक्खी है ये दाद देने को तेरी ग़ज़ल पर,
कैसे कहूँ कितनी दाद तो मुझसे तेरे हमनाम ले जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-306

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