14.2.24

M-083 जीवन मे,

जीवन मे, जितने भी लोग आते हैं,
कुछ न कुछ, ज़रूर सिखा जाते हैं,
हमारी आंखें तो रह जातीं मुंदी हुई,  
वही तो हैं जो दुनियां दिखा जाते हैं

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-083

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...