राहे-मुहब्बत में अब होना है जो होने दो,
उड़ती हैं धज्जियां उसूलों की तो उड़ने दो।
कब दिया है साथ ज़माने ने जो अब देगा,
ख़ाक़ में मिलता है ज़माना तो मिलने दो।
उड़ती हैं धज्जियां उसूलों की तो उड़ने दो।
कब दिया है साथ ज़माने ने जो अब देगा,
ख़ाक़ में मिलता है ज़माना तो मिलने दो।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-155
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