भला कौन रोक पाया है परिंदों एक ही जगह,
पंख हैं तो उड़ेंगे ही एक जगह से दूसरी जगह,
कोई आसमाँ कर रहा होता है इंतज़ार उनका,
कैदे-कफ़स में भी फड़फड़ाएंगे अपनी जगह।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-152
पंख हैं तो उड़ेंगे ही एक जगह से दूसरी जगह,
कोई आसमाँ कर रहा होता है इंतज़ार उनका,
कैदे-कफ़स में भी फड़फड़ाएंगे अपनी जगह।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-152
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