10.2.24

S-304 जिसके होंठ ही

जिसके होंठ ही देते हों मात सभी गुलाबों को,
उसे मैं एक मामूली सा गुलाब देना नहीं चाहता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-304

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