18.1.24

S-301 ज़िंदगी का आखरी

ज़िन्दगी का आख़री सबक पा चुके हैं हम,
नफ़रत के ऐसे दौर से गुज़रके आ चुके हैं हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-301

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K-007 सूरज को मैं

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