ठंड चाहे कितनी भी क्यों न पड़ ले,
कुछ लोग नफ़रतों की आग में जलते ही रहेंगे।
कुछ लोग नफ़रतों की आग में जलते ही रहेंगे।
गर्मी चाहे कितनी भी कड़क पड़ ले,
कुछ लोग कलेजे पर ठंडक महसूस ही करेंगे।
बरसात चाहे कितनी भी गिर ले,
ख़ुश्क और बेजान से चेहरे रूखे-सूखे ही रहेंगे।
बहारें कितनी भी हरियाली फैला दें,
मगर कुछ लोग उसे फिर भी पतझड़ ही कहेंगे।
कितना भी सीधा सादा क्यों न हो कोई,
कुछ लोग उसे बंदा 'कॉम्प्लिकेटेड' ही कहेंगे।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" K-014
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