ख़ुदा करे 'उसकी' दवाओं का असर न हो मुझपे,
ता-उम्र मैं 'उसका' बीमार बना रहना चाहता हूँ।
मुझसे छीन ना लेना इंतज़ार की घड़ियां, ऐ ख़ुदा,
मैं तो बस मुंतज़िर-ए-यार बना रहना चाहता हूँ।
ता-उम्र मैं 'उसका' बीमार बना रहना चाहता हूँ।
मुझसे छीन ना लेना इंतज़ार की घड़ियां, ऐ ख़ुदा,
मैं तो बस मुंतज़िर-ए-यार बना रहना चाहता हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-149
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