25.11.23

S-291 जब सहन न हो

 जब सहन न हो दोस्तों का नज़रंदाज़ करना,
तो बेहतर है ख़ुद को अजनबी मंजूर करना।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-291

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