देर कर दी तुमने, अब जा कर प्यार तुम्हे मुझ पर आया,
अबतो भावनाओं का दाह-संस्कार भी मैं खुद कर आया,
यह देखो मेरी मृत-भावनाओं के अवशेषों का कलश,
नदी में विसर्जित करके अभी अभी मैं वापस घर आया।
अबतो भावनाओं का दाह-संस्कार भी मैं खुद कर आया,
यह देखो मेरी मृत-भावनाओं के अवशेषों का कलश,
नदी में विसर्जित करके अभी अभी मैं वापस घर आया।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-079
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