9.11.23

P-228 कुछ अनजाने, कुछ देर को

कुछ अनजाने जो कुछ देर को, कुछ-कुछ अपने हो गए,
हालात के कुछ ही झोंकों में वो जाने कहाँ फुर्र से हो गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-228

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