11.10.23

S-284 मुहब्बत भी कर ले

मुहब्बत भी कर ले,  कंफ्यूज़न निकाल के,
जैसे ज़ुल्फ़ बिखरा लीं तूने ख़म निकाल के,

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-284

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...