कोई हो गया बेवफ़ा तो होजाए, मैं ग़मज़दा नहीं हूँ।
मेरे इर्दगिर्द पड़े हैं जाम इतने,पर मैं तिशनगा नहीं हूँ।
चाय-कॉफी की चुस्कियाँ ही बढ़ा देती हैं लौ मेरी,
मैं तो जलता हुआ चराग़ हूँ, मैं कभी बुझा नहीं हूँ।
मेरे इर्दगिर्द पड़े हैं जाम इतने,पर मैं तिशनगा नहीं हूँ।
चाय-कॉफी की चुस्कियाँ ही बढ़ा देती हैं लौ मेरी,
मैं तो जलता हुआ चराग़ हूँ, मैं कभी बुझा नहीं हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-135
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