9.10.23

Q-135 कोई हो गया बेवफ़ा

कोई हो गया बेवफ़ा तो होजाए, मैं ग़मज़दा नहीं हूँ।
मेरे इर्दगिर्द पड़े हैं जाम इतने,पर मैं तिशनगा नहीं हूँ।
चाय-कॉफी की चुस्कियाँ ही बढ़ा देती हैं लौ मेरी,
मैं तो जलता हुआ चराग़ हूँ, मैं कभी बुझा नहीं हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-135

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...