22.10.23

P-224 हम नाज़ुक दिलों को

हम नाज़ुक दिलों को कहां आता है पत्थर दिलों से टकराना,
हम ख़ुद ही टूट कर बिखर जाते हैं, ज़रा सी एक ठसक से। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-224

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