लिखने बैठा तो कुछ सूझा ही नहीं,
शायद आज मुझ में ऊर्जा ही नहीं।
सोचा था आज बता देंगे हाल उसे,
किंतु निर्दयी ने आज पूछा ही नहीं।
शायद आज मुझ में ऊर्जा ही नहीं।
सोचा था आज बता देंगे हाल उसे,
किंतु निर्दयी ने आज पूछा ही नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-072
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