25.8.23

M-073 मौसम भी है नीरस

मौसम भी है नीरस  ऊट पटांग सा,
कुछ-कुछ बिन बुलाए मेहमान सा"
तुम बिन सभी है अव्यवस्थित प्रिये,
घर लग रहा मुझे खंडहर मकान सा।

 -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-073

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K-007 सूरज को मैं

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