18.7.23

M-069 संभवतः काल्पनिक थीं

संभवतः काल्पनिक थीं मेरी ख़ुशियाँ,
अकारण जो प्रिय लगने लगी दुनियाँ, 
मृगतृष्णा थी वे शायद कुछ वक्त की,
या फिर वो थीं मेरी ही ग़लतफ़हमियां।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-069

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