29.6.23

S-272 अपनी होके ही रहेगी

अपनी होके ही रहेगी वो शय, गर लिखी है लकीरों में,
नादाँ हैं वो, जो उसे बांध कर रखते हैं ज़ंजीरों में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-272

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