25.6.23

Q-121 लड़ता रहा माकूल थे

लड़ता रहा माकूल थे जबतक हालात मेरे।
मगर बहुत बदल गए हैं  अब ख़्यालात मेरे।
ज़माने में वो पहले जैसा तवाज़ुन रहा नहीं,
हार-थक कर अब सो गए हैं  जज़्बात मेरे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-121

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...