लड़ता रहा माकूल थे जबतक हालात मेरे।
मगर बहुत बदल गए हैं अब ख़्यालात मेरे।
ज़माने में वो पहले जैसा तवाज़ुन रहा नहीं,
हार-थक कर अब सो गए हैं जज़्बात मेरे।
मगर बहुत बदल गए हैं अब ख़्यालात मेरे।
ज़माने में वो पहले जैसा तवाज़ुन रहा नहीं,
हार-थक कर अब सो गए हैं जज़्बात मेरे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-121
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