4.4.23

Q-106 बेहद खल रही है

बेहद खल रही है जुदाई उसकी,
मुझपे ये कैसी घड़ी आन पड़ी है। 
लौटा भी नहीं सकता मैं उसको,
वो निशानी जो मेरे पास पड़ी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-106

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