नज़दीक आता जा रहा हूँ हकीकत के,
ख्वाबों में और जीने को मन नहीं करता।
आ जाना चाहता हूँ, अब साहिल पर मैं,
गहराई में और जाने को मन नहीं करता।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-109
ख्वाबों में और जीने को मन नहीं करता।
आ जाना चाहता हूँ, अब साहिल पर मैं,
गहराई में और जाने को मन नहीं करता।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-109
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