11.4.23

S-257 ग़मों का अजायबघर

ग़मों का अजायब-घर हूँ,दिल मे दर्द हैं किस्म-किस्म के,
किसी कोने में दर्दे-नफ़रत है, तो किसी में दर्दे-मुहब्बत भी।

 -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-257

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