16.3.23

S-242 फ़क़्त एक तारा टूट

फ़क़्त एक तारा टूट गया तो क्या हुआ,
बेशुमार सितारे और भी हैं आसमाँ में। S-242

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...