15.3.23

Q-100 मैं अपनी शाख़

मैं अपनी शाख़ से रहा बावफ़ा सदा,
इतने पतझड़ आए गए कब गिरा हूँ।
जब शाख़ ने ही मुझे कर दिया जुदा,
शजर के नीचे ज़मीं पर अब गिरा हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-100

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