5.3.23

P-194 मुहब्बतों में

मुहब्बतों में कंजूसी,नफ़रतों में फ़राख़दिली,
इंसाँ टस से मस न हुआ न कोई इबरत ही मिली।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-194

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