31.3.23

M-057 कुछ दूर के लिए हमसफ़र

कुछ दूर के लिए हमसफ़र था वो,
किसी दोराहे से मुड़ जाने के लिए।
मेरे साथ चल तो रहा था वो, पर
मुझको अकेला छोड़ जाने के लिए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-057

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...