हमे क्या पता था ख़रीदी जा सकती है मुहब्बत दुकानों से भी,
हम भी ख़रीद सकते थे एक अदद मुहब्बत अपने वास्ते भी।
बड़ी देर से खुली ये दुकान, काश कि ज़रा पहले खुल जाती,
मुहब्बत के वास्ते किसी के न्योहरे तो न करने पड़ते हमे भी।
हम भी ख़रीद सकते थे एक अदद मुहब्बत अपने वास्ते भी।
बड़ी देर से खुली ये दुकान, काश कि ज़रा पहले खुल जाती,
मुहब्बत के वास्ते किसी के न्योहरे तो न करने पड़ते हमे भी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-054
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