26.3.23

S-245 मशहूर हो गया हूँ

मशहूर हो गया हूँ अपने दर्द-ओ-ग़म के लिए इस कदर,
कि अब लोग मुझे मेरे चेहरे से नहीं मेरे दर्द से पहचानते हैं।








-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-245












बी" S-245
x

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...